#मंच को नमन 🙏
#कलम रथ परिवार
#विषय : योग
#विधा : कविता
#दिनांक: 22/6/2023
" योग "
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तन मन सुख दुःख ,
काया का झगड़ा ।
योग निदान ,
सुख जीवन का सगड़ा ।
नित्य सवेरा लेकर ,
तुम जागो ।
नियमित योग साधना,
तप को नापो ।
स्वस्थ शरीर का यही ,
चलन उपाय ।
सच हैं दर्शन ,
हर शास्त्र बताए ।
भोर का योग ,
जीवन का अमृत ।
जीना हैं तो ,
बस पीते जाए ।
ना कोई नागा ,
ना कोई देर ।
तुरन्त निभाओ हल यही,
जीवन का मेल ।
सच जीवन की दौलत ,
यही समझाती ।
नहीं बड़ा कोई इससे खेल ।
कलम ✍
अरुण ठाकर , जिन्दगी
जयपुर , राजस्थान ।
स्वरचित : मौलिक
मंच का आभार 🙏
