नमन मंच,कलम रथ
विषय माँ
विधा काव्य
10 मई 2021,सोमवार
माँ रखती नो मास गर्भ में
माँ होती ममता की मूरत।
माँ प्रिय तुलसी का बिरवा
माँ स्वयं है, देवी की सूरत।
माँ है तो, फिर क्या चिंता?
माँ शिशु की, स्वयं जान है।
माँ पद ,हिमगिरि सा ऊंचा
माँ जीवन में अति महान है।
माँ का नाम है अति सुरीला
माँ जीवन की प्रथम गुरु है।
माँ को सबसे, पहले देखा है
माँ से ही तो ,जीवन शुरू है।
माँ निज में है,त्याग तपस्या
माँ में भरा, वात्सल्य गहरा।
माँ पूजनीया माँ वंदनीया है
माँ चरणों में झुकता चेहरा।
माँ कभी ,कुमाता न होती
माँ! कुपुत्र बन जाते हमतो।
माँ क्षमाशील, माँ सुशीला
माँ महान होती हो तुमतो।
स्वरचित, मौलिक
गोविंद प्रसाद गौतम
