Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on May 25, 2021 with No comments | Categories: आ0 'ज्ञान भण्डारी' जी, कविता, खुशबू
ज्ञान भंडारी!
कलमरथ दैनिक आयोजन!
दिनाँक --25/05/2021.
विषय --खुशबू!
विधा --पद्य!
खुशबू!
खुश्बुओ की कोई किताब नहीं होती,
वो तो बसा करती है दिल के चमन में,
मधुबन खुशबू द्वार खोलता, सिखलाता है जीवन आधार,
उपहारों का संसार है रचता,
देता है अद्भुत उपहार,
जिंदगी के धूप - छाँव में,
आशा निराशा के घेरे में,
नव जीवन रोशन करता,
करता है पुलकित मन,
नेह से नेह का द्वार खुश्बुओ का दरबार लगाता,
बसा देता विरहनी का संसार,
स्व जनों को मोतियन सा चमकाता,
खुशबू फैलाता हर घर द्वार,
फूलों को आधार बना लो,
संसार खुशबू महकायेगा,
कांटो से भी प्यार करो तुम,
अश्कों की क़ीमत समझायेगा!
स्व रचित व मौलिक,
ज्ञान भंडारी!
मुंबई!

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