नमन मंच 🙏
#विघा: #गघ(कहानी)
#शीर्षक : #तोषी_की_कसम
#विषय: #कसम
क़लमरथ दैनिक आयोजन
दिनांक:24.5.2021
#तोषी_की_कसम
तन्मय का तो आज रो रो कर बुरा हाल था। रोते-रोते भी बड़बड़ाए जा रहा था- "काश !! ..... मैंने कसम तोड़ दी होती। काश !! ... मैंने कसम तोड़ दी होती"।
मां ने तन्मय को झंनझोडते हुए चिंतित स्वर में पूछा- "क्या बोले जा रहा है तन्मय ? कौन सी कसम की बात कर रहा है ? क्या बात है, मुझे अभी बता किस कसम की बात कर रहा है "? तन्मय अपने आप को रोक नहीं पाया सुबकते हुए बोला "मां, आपको याद है। पिछले महीने मैं तोषी के ससुराल बिना उसे बताए पहूंच गया था। उस दिन मैंने वहां देखा तोषी के ससुराल वाले उसके साथ बहुत बुरा बर्ताव कर रहे थे। वो उससे दहेज लाने की मांग कर प्रताड़ित भी कर रहे थे"। "हैं !! ..... तू ये क्या बोल रहा है तन्मय ? होश में तो है ? मां चिंतित, परेशान हो कुछ सोचते हुए बोली- "लेकिन तोषी ने तो कभी मुझसे या अपने पापा से इस बारे में कोई जिक्र नहीं किया।" "हां मां, तोषी ने मुझे भी इस बारे में आप दोनों से कुछ ना बताने की कसम दी थी। तोषी हमें परेशान नहीं करना चाहती थी और ना ही अपने ससुराल वालों का घिनौना चेहरा हम सबके सामने लाना चाहती थी। इस कारण बस खुद ही सारे दुख अकेले ही सह रही थी। देखो अपनी कसम देकर वह हम सब को छोड़ कर चली गई। काश !! मैंने उसकी दी हुई कसम तोड़दी होती तो शायद तोषी आज हमारे बीच होती।" तन्मय की बात सुनकर तो मां-पिताजी पर तो दुखों का पहाड़ ही टूट गया। मां-पिताजी दोनों निष्प्राण से दीवार का सहारा लिए जैसे तैसे खड़े थे। तन्मय ने दोनों को संभाला। उन्हें आश्वस्त किया की वो तोषी के ससुराल वालों पर कानूनी कार्यवाही करके उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएगा। ताकि फिर किसी तोषी को अपने माता-पिता से अपने परेशानी छुपाने या ससुराल में होने वाले दुर्व्यवहार को छुपाने के लिए किसी कसम का सहारा ना लेना पड़े। और ना ही अपने प्राणों की आहुति देकर अपने प्रियजनों को बिलखता हुआ छोड़कर जाने पर मजबूर होना पड़े।
#स्वरचित:#डॉ_शिखा_नागर
#गाजियाबाद (उ.प्र)
24 5.2021
#मैं_डाॅ_शिखा_नागर_गाजियाबाद_उप्र_से_मेरी_यह_रचना_मौलिक_व_अप्रकाशित_है।
