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Monday, May 24, 2021

May 24, 2021 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , ,
नमन कलम रथ 
24/5/2021
विषय- क़सम 
लघु कथा 
शीर्षक- सबक़

रमन को पार्टियों में जाना बहुत पसंद था । हर जगह प्रभा यानि मुझे लेकर जाता था । जबकि मुझे पार्टियों में जाना एकदम अच्छा नहीं लगता । पर पत्नी होने के कारण जाना पड़ता था । उसे मना नहीं कर पाती ।एक दिन किसी दोस्त की जन्मदिन की पार्टी थी मुझे जाने को कहा पर मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं थी सो मैंने मना कर दिया । पर रमन नहीं माना । बोला . ..जल्दी से तैयार हो जाओ ।
प्रभा बहुत सुंदर थी और जब तैयार होकर निकलती तो और भी खुबसूरत लगती । रमन को बहुत गर्व महसूस होता ये भी कारण था कि वह हर जगह उसे साथ लेकर जाता था ।
वो जब पार्टी में पहुँचे तो थोड़ी देर हो गई थी । सबने कारण पूछा । रमन बोला , प्रभा की तबियत कुछ ठीक नहीं थी। तब अचानक रमन का एक दोस्त विकास आया और प्रभा की बाँह पकड़ कर बोला , चलो भाभी आप आराम से बैठ जाओ । मैं आपके लिए कुछ पीने को लाता हूँ । आपको अच्छा लगेगा ।
प्रभा को अच्छा नहीं लगा पर सब कहने लगे आप बैठ जायें ।प्रभा जाकर बैठ गई । विकास
ठंडा लेकर आया वो पीने लगी उसे स्वाद कुछ अच्छा नहीं लगा।पर लगा कि शायद तबियत की वजह से लग रहा है ।पीने के कुछ देर बाद ही उसका सिर घूमने लगा।वो रमन को पुकारती है पर वो दोस्तों के बीच मस्त रहता है नहीं सुनता । विकास बोला ..क्या बात है भाभी कुछ परेशानी है । कहकर वह हाथ को पकड़ने की चेष्टा करने लगा ।प्रभा उसकी नियत भाँप गई कि उसका इरादा ठीक नहीं । ज़रूर ठंडा में उसने कुछ अल्कोहल मिला दिया है ।वह तुरंत उठी और भागती सी रमन के पास पहुँची . घर चलो अभी।
पर क्यों ? क्या हुआ पूछा रमन ने ।
पहले घर चलो ।
विकास भी वहाँ पहुँच गया. बोला ..भाभी तो यूँ ही घबरा रही है ।
प्रभा यहाँ कोई तमाशा करना नहीं चाहती थी।
रमन का हाथ पकड़ खींचती बाहर की ओर चल दी । उसके पैर डगमगा रहे थे । रमन को लगा तबियत
ज़्यादा बिगड़ गई है ।
घर आने के बाद प्रभा ने सारी बातें बताईं । रमन ने उसे दवा वग़ैरह दी ।रमन को सुनकर खून खौल रहा था पर प्रभा ने उसे शांत किया । रमन को सीख मिल गई थी उसने क़सम ख़ाली फिर कभी पार्टियों में जाने की ज़िद नहीं करेगा ।फिर उसने कभी वैसी पार्टियाँ में जाने की ज़िद नहीं की । पारिवारिक  आयोजन में ज़रूर जाता ।विकास से बातचीत बंद कर दी । उसने माफ़ी माँगी ।इस तरह वक्त ने बहुत बड़ा सबक़ दिया रमन को ।और ये क़सम उसकी ज़िंदगी का लक्ष्य बन गयी और खुशहाल जीवन का आधार ।
स्वरचित 
चंदा प्रहलादका

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