Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on May 25, 2021 with No comments | Categories: आ0 'गोविंद प्रसाद गौतम' जी, कविता, खुशबू
नमन मंच कलम रथ
विषय खुशबू
विधा काव्य
25 मई 2021,मंगलवार
कौन नहीं चाहता है खुशबू
खुशबू का हर नर दीवाना।
उपवन कुसुम खुशबू देते हैं
सबकी चाहत खुशबू पाना।
यश खुशबू , देती नर शांति
ज्ञान की खुशबू नित्य महके।
जीवन जीना महान कला है
कर भलाई मूर्ख क्यों बहके?
खुशबू कभी दिखाई न देवे
खुशबू को अनुभव करते हैं।
यश कीर्ति, खुशबू फैलाकर
पर हित पथ सुसंत चलते हैं।
प्यार की खुशबू अति सुहानी
खुशबू नेह जीवन का आधार।
खुशबू स्नेह, हृदय में पलता
खुशबू प्रेम, स्वप्न करे साकार।
बिन खुशबू के जीवन कुछ न
खशबू प्राणवायु में संचित हो।
नर जीवन भाग्यशाली मिलता
कोई खुशबू से नहीं वंचित हो।
स्वरचित, मौलिक
गोविंद प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

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