Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on February 18, 2022 with No comments | Categories: आ0 'सुधीर श्रीवास्तव' जी, कविता, साथ
नमनमंच
#कलमरथ_परिवार
दिनांक-१८.०२.२०२२
विषय-अपनों का साथ जरूरी है
विधा-कविता(व्यंग्य)
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मजाक अच्छा है
कि अपनों का साथ जरूरी है,
मगर आधुनिकता के इस युग में
सिर्फ मजबूरी है,
सिर्फ अपने स्वार्थ या मजबूरी में
तो ठीक है और जरुरी भी
वरना सिर्फ सीनाजोरी है।
ये मजाक नहीं तो और क्या है
माँ बाप का साथ भी
आज जरुरी कहाँ है,
साथ है भी तो बड़ी मजबूरी है,
वरना माँ बाप और संतानों के बीच
न मिटने वाली दूरी है।
चलिए मान लिया कि अपनों का साथ जरूरी है
पर अपना कहने और साथ की
जरूरत से भी अधिक जरूरी है
अपनों की औकात क्या है?
हमारा अपना स्वार्थ, हमारी अपनी जरुरतें
जो आप से पूरी हो सकती हैं,
आपकी और आपके साथ की
इससे बड़ी जरूरत और क्या हो सकती है?
अपने और अपनों का साथ
सिर्फ छलावा है,
बिना स्वार्थ के अपने और अपनों का साथ
महज दिखावा है।
अब न अपनों की जरूरत है
न अपनेपन का और अपनों के साथ का,
जो स्वार्थ सिद्ध करता रहे हमारा
हमें तो ऐसे ही अपनों के साथ की जरूरत है
बाकी सब अपने और अपनों का साथ
सब गैर जरुरी भी तो है।
सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उत्तर प्रदेश
८११५२८५९२१
© मौलिक, स्वरचित, अप्रकाशित
कलमरथ ब्लॉग में प्रकाशन की स्वीकृति देता हूं।

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