Friday, September 25, 2020

September 25, 2020 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , ,
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on September 25, 2020 with No comments | Categories: , ,
नमन मंच
कलम रथ
दिनांक -१५/०९/२०२०
विषय - संस्कार
विधा - कविता
क्रमांक -१४३

मानव जीवन की सार्थकता
प्राप्त हो जब अच्छे संस्कार
दर्पण की तरह वह चमकता
संस्कार बन जाता जीवन आधार
गर्भाधान से लेकर मृत्यु पर्यंत
संस्कारों का रहता उचित स्थान
अंतहीन श्रृंखला संस्कारों की
मनुष्य के व्यक्तित्व का करता निर्माण
अच्छे बुरे संस्कारों का प्रतिफल
जीवन में होते उनके अच्छे बुरे कर्म 
माता पिता देते बीज रूपी संस्कार
पथ प्रदर्शक बन यह जोड़ते नए संस्कार
निर्मल, संतुलित एवं सुसंस्कृत हो
सृजनात्मक शक्ति से देते जीवन को आकार
बहुमूल्य ,बेशकीमती, वैशिष्ट्य संपदा बन
अमिट छाप जीवन में  छोड़ती है संस्कार।

यह मेरी मौलिक स्वरचित एवं अप्रकाशित रचना है
कामिनी सिन्हा 
पुणे

0 comments:

Post a Comment

Bookmark Us

Delicious Facebook Favorites More Stumbleupon Twitter

Search