Monday, May 24, 2021

May 24, 2021 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , ,
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on May 24, 2021 with No comments | Categories: , ,
#कलम रथ परिवार मंच को नमन
 # दैनिक आयोजन 
# विषय कसम 
#विधा कहानी 
#दिनांक 24 मई 2021
# दिन सोमवार
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                  रमेश एक दिन पड़ोस में अपने खानदानी ताऊ रामलाल के यहां बेठा था वहां उनके छोटे भाई बनवारी लाल जी जो उस जमाने के अच्छे वकील थे और लखनऊ में रहते थे आए हुए थे रमेश ने उनके पैर छुए उन्होंने रमेश से पूछा तुम किस क्लास में पढ़ते हो रमेश ने कहा मैं कक्षा दस में पढ़ता हूं बोले तुम दसवीं क्लास में आ गए बहुत पढ़ाई कर ली फिर बोले अब तुम्हारा क्या इरादा है रमेश ने कहा मैं पढ़ लिखकर अच्छा वकील या डॉक्टर बनना चाहता हूं , मुस्कुराते हुए बोले अपने बाप दादा से ज्यादा पढ गए  जिसके घर में कोई न पढ़ा हो इतना पढ़ लिया बहुत है।
                       यह बात रमेश को-बहुत चुभ गई उसने उसी समय उनके सामने कसम ली कि 10 साल के भीतर मैं आपको आपके समकक्ष खड़ा दिखाऊंगा व रमेश ने जी जान से मेहनत कर  अपने को एक सफल अधिवक्ता के रूप में स्थापित किया। व बनवारी लाल के सामने उनको यह दिखा दिया की जो बात लग जाती है वह हर मंजिल आसान कर देती है  इस कहानी से हमें सीख मिलती है तीखे व्यंग बढ़-चढ़कर नहीं बोलने चाहिए जो आदमी को ठेस पहुंचाए रमेश की कसम ने रमेश को प्रेरणा दी जिसके फलस्वरूप वह एक सफल अधिवक्ता साबित हुआ।

 स्वरचित  अप्रकाशित मौलिक  कहानी।
 नृपेन्द्र कुमार चतुर्वेदी एडवोकेट।
 प्रयागराज उत्तर प्रदेश।

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