Monday, May 24, 2021

May 24, 2021 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , ,
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on May 24, 2021 with No comments | Categories: , ,
नमन क़लम रथ परिवार
दिनांक-24/05/21
विषय-कसम
विधा -कहानी
सुहाना और रहीम दोनों एक-दूसरे से बेइंतहा मुहब्बत करते थे मगर गांव वालों को उनकी मुहब्बत रास न आई ..
इसलिए गांव वालों ने सरपंच को बुलाकर पंचायत बैठाया दोनों के मां बाप से उनकी रजामंदी जानी गई और पंचायत में सलमा जो कबीर की दोस्त और सुहाना की सहेली थी उसने पंचायत में यह कसम खा लिया कि कबीर और सुहाना आपस में प्यार करते हैं उनको दोनों को सादी करनी चाहिए और सुहाना और रहीम की नहीं ..
पंचायत में इस बात पर बहस छिड़ गई कि जो कसम सलमा ने खाई वह झूठी है या सच्ची ..
अगर सलमा झूठ बोल रही है तो क्यूं .. क्या सलमा सुहाना और कबीर से जलती थी और फिर उसने अपनी मां की झूठी कसम क्यूं खाई..
यह जरूरी नहीं जो कुछ गीता पर हाथ रखकर अदालत में बोला जाए वह सच ही हो ..आज के युग में सच बोलने के लिए बहुत बड़ा जिगर होना चाहिए.. कबीर ने रहीम का हाथ पकड़ते हुए कहा।
क्यों तुम इतने बड़े समझदार कब से होगये कबीर की सच क्या है झूठ क्या है तुम उसे पहचान सको जब अदालत का जज नहीं फैसला कर पाता कि असली सच क्या है बस उसे यह लगता है कि गीता या कुरान पर हाथ रखकर कसम खाने वाला हर इंसान सच ही बोलता होगा बस वही सच मान लेता है ..रहीम ने मुस्कुराते हुए कहा।
कसम तो कोई झूठी क्यूं खाएगा दद्दा..वह भी गीता और कुरान की.. सुन्दर ने कबीर से पूछा ।
यह तो आज कल धंधा सा हो गया है सुन्दर ...यहां कचेहरी में लोग पैसों की लालच में गीता कुरान क्या अपनी औलाद तक की झूठी कसमें खा जाते हैं और उन्हें या उनके परिवार का इसी से भरण पोषण भी चलता है..रहीम ने सुंदर को समझाते हुए कहा ।
भैय्या कसम झूठी है या सच्ची वह तो खाने वाला ही समझ सकता है या फिर ऊपरवाला.. खुद तो मोह माया की लालच में फंसा होता है और ऊपर वाला अपने समय पर ही उसका फैसला करता है.. कबीर ने मुस्कुराते हुए बोला।
मगर यहां बात कुछ दूसरी है कबीर भाई ..न तो यह अदालत है न कोई यहां पर पुलिस की कोई जबरदस्ती फिर सलमा ने क्यों अपनी मां की कसम खाई कि रहीम और सुहाना एक दूसरे को प्यार करते है.. सुन्दर ने रहीम की तरफ इशारा करते हुए कहा।
सलमा ने झूठी कसम इस लिए खाई कि वह कबीर से प्यार करतीं थीं और कबीर उससे नहीं किसी और से प्यार करता था इस जलन में उसने झूठी कसम खा कर रहीम और कबीर में नफरत और दुश्मनी पैदा करना चाहतीं थीं जो कि आपस मे सच्चे मित्र थे ..
कसम तो कसम होती है पर सच्चाई का पता कसम से नहीं खुद की मंजूरी से होती है और हमने कबूल कर लिया कि मैं सुहाना से प्यार करता हूं और यह सत्य है..रहीम ने सभी से हाथ जोड़कर कहा और सुहाना को गले लगा लिया ..
राजन मिश्र 
स्वरचित
अंकुर इंक्लेव
करावलनगर दिल्ली 94

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