Monday, May 24, 2021

May 24, 2021 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , ,
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on May 24, 2021 with No comments | Categories: , ,

#कलम रथ परिवार साहित्य मंच 
#दिनांक : 24 मई 2021.
#दिन : सोमवार
#विषय : कसम
#विधा : कहानी
शीर्षक : सैनिक की कसम

यह कहानी सत्य घटना पर आधारित है पात्र और स्थान बदले हैं| देवेश आज छुट्टी पे घर के लिए निकला था| बहुत दिनों बाद छुट्टी मंजूर हुई थी| ट्रेन के एसी 2 टायर में बैठकर वो अपने गाँव की ओर जम्मू से चला| लंबी यात्रा थी, और बहुत सी यादें| उसे याद आ रही थी वो खाई हुई कसमें| पहले देश, फिर जनता, उसके बाद साथी सैनिक, परिवार और अंत में ख़ुद की रक्षा| वैसे तो देवेश छुट्टी पे जा रहा था किन्तु जो सेना में नियुक्ति के समय कसम ली थी उसके अनुसार एक सैनिक हमेशा ड्यूटी पे तत्पर रहता है| यात्रा का एक पढ़ाव बिहार झारखंड की सीमा पे पड़ता था जहां हमेशा कानून व्यवस्था के क्षेत्र को लेकर विवाद रहता है जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठाते थे| सभी यात्री सोने की तैयारी करने लगे देवेश भी फ्रेश होने सीट नंबर 46 की ओर के शौचालय की ओर गया| ऐसा लगा कि किसी स्टेशन पर ट्रेन रुकी और एकदम से चल पड़ी| अचानक कोच में हल्ला मच गया देवेश ने बाहर आना चाहा तो पाया कि किसी ने छड़ लगा के दरवाजा लॉक कर दिया| अपनी कमांडो ट्रेनिंग को याद करके देवेश ने छड़ को मोड़कर बाहर झाँका| कोच में उसे लगा कि करीब 8-10 लोग घुस आए हैं और यात्रियों को लूट रहे हैं और महिलाओं के साथ बदतमीजी भी कर रहे हैं| यह देख देवेश से रहा ना गया| उसने साइड बर्थ में बैठे यात्री को सरकने का इशारा किया और धीरे से ऊपर चढ़ के अपनी और लुटेरों की स्थिति का जायज़ा लिया| एक योजना के तहत उसने प्लान को अंजाम देना शुरू किया| और एक एक करके लुटेरों की कोशिशों को नाकाम करते हुये आगे बढ़ा| दूसरी तरफ लुटेरों का सरदार एक लड़की को अगवा करने की कोशिश कर रहा था और सभी को अंजाम भुगतने की धमकी| अचानक लुटेरों के सरदार को कुछ भान हुआ कि उसके आदमी कोई दिख नहीं रहे हैं| धमकी देते हुए उसने आवाज़ लगाई कि जो भी ऐसी कोशिश कर रहा है सामने आ जाए अन्यथा लड़की को जान से मार देगा| देवेश अब सामने आ गया और कहा कि लड़की को छोड़ दे नहीं तो वो ख़ुद मारा जाएगा| इतना सुनते ही सरदार ने लड़की को एक तरफ धक्का दिया और देवेश पे दराँती से वार किया, एकदम से हुये वार से देवेश को दराँती छूते हुये निकली दोनों के बीच कुछ देर छोटी जंग चली चूंकि जगह सीमित थी और सहयात्री थे तो देवेश संभल के वार कर रहा था| इस कारण उसे कई चोटें आ गयी किन्तु अंत में देवेश ने उस सरदार को भी कब्जे में लेकर बेल्ट से बांध दिया अगले स्टेशन पे जब गाड़ी रुकी तो जीआरपी के पास एफआईआर लिखा कर लुटेरों को पुलिस के हवाले कर दिया| प्राथमिक चिकित्सा के बाद देवेश और सहयात्री अपनी यात्रा पे चल दिये| सभी सहयात्रियों और स्टाफ ने देवेश को धन्यवाद दिया| देवेश बोला कि एक सैनिक कभी भी छुट्टी पर नहीं होता क्योंकि उसने देश समाज और परिवार की सुरक्षा और संरक्षा की कसम ली होती है|

रचनाकार का नाम- संजीव कुमार भटनागर
मुंबई, महाराष्ट्र.
मेरी यह रचना मौलिक व अप्रकाशित है।

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