Monday, May 24, 2021

May 24, 2021 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , ,
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on May 24, 2021 with No comments | Categories: , ,
#नमन मंच
#कमल रथ परिवार
#विधा कहानी
#विषय कसम
#दैनिक आयोजन 2021

कस्मे वादे प्यार वफ़ा, फिर तोड़ना, और छोड़ना आगे यही सिलसिला चलता है कसमें तोड़ दी जाती हैं वादे विफलता की ओर अग्रसर होते है। वफ़ा भूल जाते है, प्यार के नगमे भूल जाते है, वो तराने याद नहीं आते।।

हमारे गांव में एक लड़का और लड़की दोनों बेइंतहा मोहब्बत करते थे। दोनों एक ही जाति के थे दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा था आसपड़ोस में सभी को मालूम था।

 ये बात धीरे धीरे माता पिता तक पहुंच गई। मातापिता ने शादी के लिए एक दूसरे से बात की। पर उनके पिताजी ने शादी के लिए दहेज की मांग की। पर लड़की के पिता गरीब थे उन्होंने बहुत समझाया पर उनके समझ में नहीं आया।

 लड़का लड़की दोनों से बात की। दोनों से कहा, कसमें वादे प्यार वफ़ा सब निभाओ पर शादी कर लो। और लड़का भी सभी वादों को तोड पिता के साथ हो लिया और ये शादी टूट गई। दोनों हमेशा हमेशा अलग हो गए। कसमें वादे प्यार वफ़ा सब ख़तम हो गए।

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

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